IGNOU SOLVED HINDI ASSIGNMENTS GANDHI AND PEACE STUDIES(MODULAR)

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पाठ्यक्रम: गांधी : व्यक्ति और उनका युग (एम जी पी–001)

अध्यापक जाँच सत्रीय कार्य

सत्रीय कार्य क्रमांक : एम जी पी–001/एस एस टी/टी एम ए/2024–25

अंक: 100

Note: आपको कुल पाँच प्रश्न करने हैं, प्रत्येक भाग में से कम से कम दो प्रश्नों का उत्तर करना अनिवार्य है। प्रत्येक प्रश्न के उत्तर की शब्द–सीमा लगभग 500 शब्द है। प्रत्येक प्रश्न का अंक 20 है।

भाग – I

  1. गांधी के स्वयं के प्रारंभिक सामाजिक समस्याओं के विचारों को किस प्रकार से प्रस्तुत किया गया है? स्पष्ट कीजिए। (20 अंक)
  2. गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय के लिए कौन–कौन से विभिन्न संघर्षों में भाग लिया? स्पष्ट कीजिए। (20 अंक)
  3. आपकी राय में, बंटवारे के मुद्दे पर गांधी की क्या सोच थी? स्पष्ट कीजिए। (20 अंक)
  4. आपके विचार में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर द्वितीय विश्व युद्ध का क्या प्रभाव पड़ा? स्पष्ट कीजिए। (20 अंक)
  5. भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष में भगत सिंह की भूमिका और योगदान का मूल्यांकन कीजिए। (20 अंक)

भाग – II

निम्नलिखित पर लगभग 250 शब्दों (प्रत्येक) में संक्षिप्त लेख लिखिए:

  1. क) गोपाल कृष्ण गोखले (10 अंक)
    ख) दलित वर्ग का प्रतिनिधित्व (10 अंक)
  2. क) भारतीय मुस्लिम लीग (10 अंक)
    ख) गांधी जी द्वारा की गई आलोचना तिलक के ‘स्वराज्य’ आंदोलन के रूप में कीजिए। (10 अंक)
  3. क) ग्रामीण स्वराज्य (10 अंक)
    ख) भारतीय समाज पर गांधी का प्रभाव (10 अंक)
  4. क) दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह (10 अंक)
    ख) गांधी के रचनात्मक कार्यक्रम पर उनके विचार (10 अंक)
  5. क) गांधी–हरिजन समस्या (10 अंक)
    ख) गांधी बनाम सुभाष चंद्र बोस (10 अंक)


पाठ्यक्रम: गांधी का दर्शन (एम जी पी–002)

अध्यापक जाँच सत्रीय कार्य

सत्रीय कार्य कोड : एम जी पी–002 / ए एस एस टी / टी एम ए/ 2024-25

पूर्णांक: 100

आपको कुल पाँच प्रश्न करने हैं, प्रत्येक भाग में से कम से कम दो प्रश्नों का चयन करना अनिवार्य है। प्रत्येक प्रश्न के उत्तर की शब्द–सीमा लगभग 500 शब्द है। प्रत्येक प्रश्न 20 अंक का है।

भाग – I

  1. गांधी किस प्रकार से निरपेक्ष और सापेक्ष सत्य के बीच अंतर करते हैं, स्पष्ट कीजिए।
  2. गांधी की अहिंसा की संकल्पना के अर्थ और महत्व का आलोचनात्मक विवेचन कीजिए।
  3. राष्ट्र–राज्य और आधुनिक औद्योगिकीकरण की धारणा अव्यवहार्य है। गांधी के विचारों की विवेचना कीजिए।
  4. गांधी का धर्म सार्वभौमिक धर्म है जो कि परस्परता, अहिंसात्मकता और नैतिकता से प्रेरित है। विवेचना कीजिए।
  5. स्वराजी के सिद्धांत की गांधी समकालीन महत्व में इसकी प्रासंगिकता पर परिचर्चा कीजिए।

भाग – II

निम्नलिखित पर लगभग 250 शब्दों (प्रत्येक) में संक्षिप्त लेख लिखिए:

  1. (क) गांधी का सत्य ईश्वर है का सिद्धांत
    (ख) सत्याग्रह और गांधी के आर्थिक विचार
  2. (क) सार्वभौमिक धर्म – अहिंसा में एकता
    (ख) सत्याग्रह: नैतिकता, राजनीतिक और आर्थिक, दोनों स्वतंत्रता है।
  3. (क) स्वराज्य पर गांधी के विचार
    (ख) गांधी के आर्थिक विचारों की प्रासंगिकता
  4. (क) गांधी और अनेकार्थवाद
    (ख) गांधी और हरिजन
  5. (क) गांधी का ग्राम स्वराज्य का तत्त्व
    (ख) सत्य और अहिंसा के सिद्धांत, स्वतंत्रता, स्वराज्य और समान के रूप में


पाठ्यक्रम: गांधी का सामाजिक चिंतन (एम जी पी-003)

अध्यापक जाँच सत्रीय कार्य

सत्रीय कार्य कोड : एम जी पी-003 / ए एस एस टी / टी एम ए / 2024-25

अंक: 100

आपको कुल पाँच प्रश्न करने हैं, प्रत्येक भाग में से कम से कम दो प्रश्नों का उत्तर करना अनिवार्य है। प्रत्येक प्रश्न के उत्तर की शब्द-सीमा लगभग 500 शब्द है। प्रत्येक प्रश्न 20 अंक का है।

भाग – I

  1. गांधी ने ‘धर्मनिरपेक्षता’ को सामाजिकता का स्वीकार किया है। उनके धर्म और धर्मनिरपेक्षता के विचारों का विश्लेषण कीजिए।
  2. गांधी के अनुसार महिलाएँ संस्कृति और मूल्यों की रक्षक होती हैं। परीक्षण कीजिए।
  3. सामाजिक सौहार्द के गांधी दृष्टिकोण का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
  4. यह कहा जाता है कि गांधी की की धारणा, सभी ऐतिहासिक धर्मों से श्रेष्ठ थी। परीक्षण कीजिए।
  5. भारत के राष्ट्रीय पुनर्निर्माण में युवाओं की भागीदारी के बारे में गांधी की क्या भूमिका थी? विस्तृत रूप से वर्णन कीजिए।

भाग – II

निम्नलिखित पर लगभग 250 शब्दों (प्रत्येक) में संक्षिप्त लेख लिखिए:

  1. क) भारत के लिए राष्ट्रीय भाषा के विकास की दिशा में गांधी के प्रयास और पहल
    ख) बाल विवाह पर गांधी के विचार
  2. क) औद्योगिक श्रम पर गांधी के विचार
    ख) गांधी के ग्रामस्वराज्य का आधार शारीरिक नहीं बल्कि नैतिक है। परीक्षण कीजिए।
  3. क) सत्य का अनुसरण करने के साधन के रूप में अहिंसा पर गांधी के विचार
    ख) गांधी के ‘अपरिग्रह’ के विचार का आर्थिक और सामाजिक विकास पर गांधी के विचार


पाठ्यक्रम: गांधी का राजनीतिक चिंतन (एम जी पी–004)

अध्यापक जाँच सत्रीय कार्य

सत्रीय कार्य कोड : एम जी पी–004 / ए एस एस टी / टी एम ए / 2024–25

अंकित: 100

आपको कुल तीन प्रश्न करने हैं, प्रत्येक भाग में से कम से कम दो प्रश्नों का चयन करना अनिवार्य है। प्रत्येक प्रश्न के उत्तर की शब्द–सीमा लगभग 500 शब्द है। प्रत्येक प्रश्न 20 अंक का है।

भाग – I

  1. औद्योगीकरण की प्रक्रिया के सम्बन्ध में गांधी की आलोचना का विवेचन कीजिए।
  2. स्वराज की अवधारणा में गांधी के राजनीतिक और नैतिक विचारों का विवेचन कीजिए।
  3. गांधी के अनुसार आर्थिक समानता अहिंसात्मक आत्मनिर्भरता की प्रमुख शर्त है। चर्चा कीजिए।
  4. गांधी के अनुसार शक्ति और अधिकार के केन्द्रीकरण के परिणामस्वरूप भ्रष्टाचार बढ़ता है और इसलिए राजनीतिक शक्ति को विकेन्द्रित करने की आवश्यकता को रेखांकित कीजिए। 21वीं सदी में इसकी प्रासंगिकता की चर्चा कीजिए।
  5. फासीवाद और नस्लवाद के बारे में विस्तृत रूप से समीक्षा कीजिए।

भाग – II

निम्नलिखित पर लगभग 250 शब्दों (प्रत्येक) में संक्षिप्त लेख लिखिए।

  1. दण्डात्मक न्यायशास्त्र का गांधी की अवधारणा
  2. गांधीवादी शांतिवाद के मुख्य तत्व
  3. गांधी दर्शन में रचनात्मक कार्यक्रम की भूमिका
  4. गांधी और भारतीय समाजवाद
  5. (क) समाजवाद और साम्यवादी विचार और सत्ता का पुनर्वितरण
    (ख) गांधी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांत के सन्दर्भ में नेहरू के विचार
    (ग) गांधी का सर्वोदय समाज
    (घ) राज्य, धर्म और नागरिक अधिकार


पाठ्यक्रम: शांति और संघर्ष समाधान का परिचय (एम जी पी-005)

अध्यापक जाँच सत्रीय कार्य

सत्रीय कार्य कोड : एम जी पी-005/ए एस एस टी/टी एम ए/2024-25

अंक: 100

आपको कुल पाँच प्रश्न करने हैं, प्रत्येक भाग में से कम से कम दो प्रश्नों का चयन करना अनिवार्य है। प्रत्येक प्रश्न के उत्तर की शब्द-सीमा लगभग 500 शब्द है। प्रत्येक प्रश्न 20 अंक का है।

भाग – I

  1. ‘सहभागितापूर्ण लोकतंत्र’ शब्द की परिभाषा दीजिए और इसकी संस्थागत आवश्यकताओं का वर्णन कीजिए।
  2. संघर्ष के स्त्रोतों पर विभिन्न सैद्धांतिक परिप्रेक्ष्यों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
  3. सकारात्मक नीति के गुणों और सीमाओं का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
  4. ‘स्वतंत्रता’ शब्द से आप क्या समझते हैं? किस प्रकार से यह, संघर्ष समाधान में सहायक होता है?
  5. अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में संघर्ष समाधान की कौन-कौन सी दृष्टिकोण आपको अधिक उचित लगते हैं? कारण दीजिए।

भाग – II

निम्नलिखित पर लगभग 250 शब्दों (प्रत्येक) में संक्षिप्त लेख लिखिए:

  1. बेनकॉफ के विवाद समाधान तंत्र और शांति शिक्षा
  2. समानता और स्वतंत्रता
  3. अवरोधक (coercive) उपायों से विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को सुनिश्चित करने की समस्याएँ और संभावनाएँ
  4. आतंकवाद और आक्रमण
  5. मानव अधिकार और संघर्ष समाधान में गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका



पाठ्यक्रम: गांधी के आर्थिक विचार (एम जी पी ई–006)

अध्यापक जाँच प्रश्न पत्र

सत्रीय कार्य कोड : एम जी पी ई–006 / एस एस ई / टी एम / 2024–25

अंक: 100

आपको कुल पाँच प्रश्न करने हैं, प्रत्येक भाग में से कम से कम दो प्रश्न का चयन करना अनिवार्य है। प्रत्येक प्रश्न के उत्तर की शब्द–सीमा लगभग 500 शब्द है। प्रत्येक प्रश्न 20 अंक का है।

भाग – I

  1. ब्रिटिश औपनिवेशिक आर्थिक नीति की ‘राष्ट्रवाद’ की दृष्टि से आलोचनात्मक जाँच कीजिए।
  2. इच्छाओं की बाहुल्यता और संयमशीलता, दोनों ही तत्व, नैतिक पतन और सामाजिक विघटन की ओर ले जाते हैं। (गांधी) । टिप्पणी कीजिए।
  3. आपके मत में गांधी के रचनात्मक (रचनात्मक) के सिद्धांत की मूल विशेषताएँ और गुण–दोष क्या हैं। विवेचन कीजिए।
  4. विकास के प्रमुख प्रतिमान और विकास के गांधीवादी विचार के बीच मुख्य अंतर को स्पष्ट कीजिए।
  5. भारत में आर्थिक संकेंद्रण (सत्याग्रह) और सामाजिक न्याय को उच्च स्तर के लिए गांधी द्वारा कौन से उपाय सुझाए गए हैं, विवेचन कीजिए।

भाग – II

निम्नलिखित पर लगभग 250 शब्दों (प्रत्येक) में संक्षिप्त लेख लिखिए।

  1. क) भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ
    ख) गांधी की शिक्षा की अवधारणा
  2. क) गांधी का औद्योगीकरण का प्रतिमान (Model) और इसकी वर्तमान में प्रासंगिकता
    ख) ब्रेड श्रम (Bread Labor)
  3. क) टॉल्स्टॉय और बर्नार्ड–शॉई स्कूलों की भूमिका और प्रासंगिकता
    ख) गांधी का समाज सुधारकों के प्रति दृष्टिकोण
  4. क) गांधी के आर्थिक विचारों की समीक्षात्मक
    ख) गांधी का ग्राम स्वराज्य का दृष्टिकोण
  5. क) स्वदेशी, स्वावलंबन और स्वराज्य का कार्यक्रम
    ख) गांधी की आत्म–निर्भरता की संकल्पना


पाठ्यक्रम: गांधी के बाद अहिंसक आन्दोलन (एम जी पी ई–007)

अध्यापक जाँच सम्बन्धी कार्य

सत्रीय कार्य कोड : एम जी पी ई–007 / एम एस सी टी / टी एम ए / 2024–2025

पूर्णांक: 100

आपको कुल पाँच प्रश्न करने हैं, प्रत्येक भाग में से कम से कम दो प्रश्नों का चयन करना अनिवार्य है। प्रत्येक प्रश्न के उत्तर की शब्द–सीमा लगभग 500 शब्द है। प्रत्येक प्रश्न 20 अंक का है।

भाग – I

  1. भारतीय परिप्रेक्ष्य के विशेष सन्दर्भ में, निःशस्त्र आन्दोलन व इसके प्रभाव की समीक्षा कीजिए।
  2. अहिंसात्मक आन्दोलन की गतिकता (dynamics) क्या है? वे किस प्रकार के परिणाम उत्पन्न करते हैं?
  3. बन्ध निर्माण किस प्रकार पारिस्थितिक सन्तुलन को परिवर्तित करते हैं? सविस्तार उदाहरण सहित सविस्तार वर्णन कीजिए।
  4. प्रतिरोधक अभियानों के विशेष सन्दर्भ में, यूरोप में ग्रीनपीस के प्रमुख प्रयासों की गणना कीजिए।
  5. संयुक्त राज्य अमेरिका में नागरिक अधिकार आन्दोलन क्या था? इसके सन्दर्भ में डेमोक्रेट्स (जनतन्त्रवादी) और रिपब्लिकन्स (गणराज्यवादियों) के क्या विचार हैं?

भाग – II

निम्नलिखित पर लगभग 250 शब्दों (प्रत्येक) में संक्षिप्त लेख लिखिए:

  1. क) राष्ट्रीय जन जागरूकता अभियान
    ख) पर्यावरण व फेमिनिस्ट आन्दोलन का उदय
  2. विपश्यना आन्दोलन
  3. गांधी – निर्वाचित हितों के संरक्षक के रूप में
  4. गरीबों पर गांधी के विचार
  5. अहिंसक आन्दोलनों की विश्वसनीयता
    क) ग्रामीण आन्दोलनों की प्रमुख विशेषताएँ



पाठ्यक्रम: शांति और संघर्ष समाधान का गांधीवादी दृष्टिकोण (एम जी पी ई-008)

अध्यापक जाँच सत्रीय कार्य

सत्रीय कार्य कोड : एम जी पी ई-008 / ए एस एस टी / टी एम ए / 2024-25

अंक: 100

आपको कुल पाँच प्रश्न करने हैं, प्रत्येक भाग में से कम से कम दो प्रश्नों का चयन करना अनिवार्य है। प्रत्येक प्रश्न के उत्तर की शब्द-सीमा लगभग 500 शब्द है। प्रत्येक प्रश्न 20 अंक का है।

भाग – I

  1. स्पष्ट कीजिए कि गांधी ने अपने समय की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक समस्याओं का समाधान किस प्रकार किया।
  2. गांधी के अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों को स्पष्ट करते हुए, संघर्ष समाधान के संदर्भ में आपको क्या समझ है? स्पष्ट कीजिए।
  3. यह कहा गया है कि गांधी की अहिंसा की संकल्पना शांति निर्माण से भिन्न है। क्या आप इससे सहमत हैं?
  4. ‘स्वराज्य’ एक संघर्ष समाधान का जीवनक्रम, स्वायत्त निर्माण प्रणाली है। (धर्मराज बेहरा) क्या आप इससे सहमत हैं?
  5. शांतिपूर्ण सामाजिक व्यवस्था को सुसंगत करने में शिक्षा की भूमिका की आलोचनात्मक समीक्षा कीजिए।

भाग – II

निम्नलिखित पर लगभग 250 शब्दों (प्रत्येक) में संक्षिप्त लेख लिखिए:

  1. क) शांति प्रक्रिया में जन-भागीदारी
    ख) गांधी के विचार परंपरा
  2. सामाजिक शांति में बातचीत और संवादशीलता की प्राथमिकता
    गांधी और संवादशीलता के सिद्धांत के बीच अंतर
  3. सकारात्मक शांति की अवधारणा
    अहिंसा पर गांधी के विचार और वर्तमान में इसकी प्रासंगिकता
  4. हृदय परिवर्तन की नीति का गांधी के विचार
    संघर्ष समाधान में गांधी के विचार
  5. शांति निर्माण में महिलाओं की भूमिका और महत्त्व
    गांधी का विचार और संघर्ष समाधान में इसकी भूमिका


पाठ्यक्रम: इक्कीसवीं सदी में गांधी (एम जी पी ई-009)

अध्यापक मूल्य जांच कार्य

सत्रीय कार्य कोड: एम जी पी ई-009/ए एस एस टी/एम ए/2024-25

अधिकतम अंक: 100

आपको कुल पांच प्रश्न करने हैं, प्रत्येक भाग में से कम से कम दो प्रश्न करना अनिवार्य है। प्रत्येक प्रश्न के उत्तर की शब्द-सीमा लगभग 500 शब्द है। प्रत्येक प्रश्न 20 अंक का है।

भाग – I

  1. विश्व व्यवस्था पर गांधी के विचारों का आलोचनात्मक पुनर्विलोकन कीजिए और वर्तमान समय में उनकी प्रासंगिकता पर चर्चा कीजिए।
  2. “यदि अहिंसा हमारा धर्म बन जाए तो हम महात्मा महात्मा के साथ ही (गांधी) अंदर (भी) समानता पा सकते हैं।” गांधी के विचारों की व्याख्या कीजिए।
  3. आतंकवाद की समस्या के समाधान के लिए गांधी की दृष्टिकोण का आकलन और मूल्यांकन कीजिए।
  4. यह कहा जाता है कि भारत विश्व में सबसे बड़ा बहुसांस्कृतिक समाज है। क्या आप इससे सहमत हैं? अपने तर्क प्रस्तुत कीजिए।
  5. गांधी विज्ञान और औद्योगिकी के विरोधी नहीं थे। बल्कि उनके उपयोगों के विरोधी उनके उपयोगों के विरोधी थे। क्या आप इससे सहमत हैं? अपने तर्क प्रस्तुत कीजिए।

भाग – II

निम्नलिखित पर लगभग 250 शब्दों (प्रत्येक) में संक्षिप्त लेख लिखिए।

  1. (क) औद्योगिकी में स्थायित्व: गांधीवादी दृष्टिकोण
    (ख) गांधी के विचारों में सत्य और अहिंसा का स्थान
  2. (क) धर्म-निरपेक्षता पर गांधी के विचार
    (ख) गांधीवादी शिक्षा: सिद्धांत और कार्य-विधान
  3. (क) सामाजिक विश्व में संचार माध्यम (मीडिया) की भूमिका
    (ख) समकालीन समाज और सामाजिक लोकतंत्रिकता की गांधीवादी प्रासंगिकता
  4. (क) टिप्पणी कीजिए – गांधी एक पत्रकार के रूप में
    (ख) गांधी, साहित्य और सांस्कृतिक पुनर्जागरण
  5. (क) समकालीन सामाजिक समस्याओं का गांधी के विचारों में समाधान
    (ख) गांधी का पुनर्मूल्यांकन


पाठ्यक्रम: संधर्व प्रबंधन (एम जी पी ई–010)

अध्यापक जाँच सत्रीय कार्य

सत्रीय कार्य कोड : एम जी पी ई–010 / ए एस एस टी / टी एम ए / 2024–25

अंकित: 100

आपको कुल पाँच प्रश्न करने हैं, प्रत्येक भाग में से कम से कम दो प्रश्नों का चयन करना अनिवार्य है। प्रत्येक प्रश्न के उत्तर की शब्द–सीमा लगभग 500 शब्द है। प्रत्येक प्रश्न 20 अंक का है।

भाग – I

  1. संधर्व–उपक्रम पुनर्निर्माण और पुनर्नवा से आप क्या समझते हैं? इस कार्य में संधर्व (मीडिया) की भूमिका का परीक्षण कीजिए।
  2. जॉन गाल्टुंग द्वारा प्रतिपादित शांति, सकारात्मक शांति और सांस्कृतिक हिंसा की अवधारणा की विवेचना कीजिए।
  3. संधर्व प्रबंधन से आप क्या समझते हैं? संधर्व प्रबंधन के सामाजिक और पर्यावरणीय आयाम क्या हैं? परीक्षण कीजिए।
  4. विकासशील समाजों में संधर्व समानता में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका की जाँच कीजिए।
  5. गांधी की स्वराज की अवधारणा क्या है? इससे कैसे सर्वोदय और अंत्योदय के लिए मार्ग प्रशस्त होता है?

भाग – II

प्रश्न के प्रत्येक भाग पर लगभग 250 शब्दों में टिप्पणी कीजिए:

  1. (क) विश्व के और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों को की भूमिका
    (ख) गांधी की आधुनिक विश्व में भारत का स्थान
  2. (क) संधर्व उपक्रम
    (ख) संधर्व प्रबंधन
  3. (क) शांति निर्माण के लिए गांधीवादी दृष्टिकोण
    (ख) संधर्व प्रबंधन के सामाजिक और पर्यावरणीय आयाम
  4. (क) गांधी का स्वराज
    (ख) विकासशील समाजों में राजनीतिक उपनिवेश
  5. (क) उपनिवेशवाद के पुनर्निर्माण में संधर्व की भूमिका
    (ख) संधर्व प्रबंधन के सामाजिक और पर्यावरणीय आयाम


पाठ्यक्रम: मानव सुरक्षा (एम जी पी ई-011)

अध्यापक जाँच सत्रीय कार्य

सत्रीय कार्य कोड: एम जी पी ई-011/ए एस एस टी/टी एम ए/2024-25

अंक: 100

आपको कुल पाँच प्रश्न करने हैं, प्रत्येक भाग में से कम से कम दो प्रश्नों का चयन करना अनिवार्य है। प्रत्येक प्रश्न के उत्तर की शब्द-सीमा लगभग 500 शब्द है। प्रत्येक प्रश्न 20 अंक का है।

भाग – I

  1. दक्षिण एशिया राजनीतिक हिंसा के विभिन्न प्रकारों का क्षेत्र है। इस क्षेत्र के किसी भी एक देश का उदाहरण देते हुए अपने विचार व्यक्त कीजिए।
  2. आतंकवादी राजनीतिक हिंसा का एक असामान्य रूप है। व्याख्या कीजिए।
  3. पर्यावरण, खाद्य और आर्थिक सुरक्षा के संदर्भ में, बाहरी हस्तक्षेप के प्रभावों की रोकथाम हेतु नीतिगत उपाय क्या हैं? चर्चा कीजिए।
  4. मानव सुरक्षा पर संयुक्त राष्ट्र मिलिनियम परियोजना (2002) में स्थापित लक्ष्य और उद्देश्यों पर प्रकाश डालिए।
  5. एकीकृत बाल विकास सेवाओं को लागू करने में भारत सरकार की विभिन्न पहलों का वर्णन कीजिए।

भाग – II

निम्नलिखित पर लगभग 250 शब्दों (प्रत्येक) में संक्षिप्त लेख लिखिए।

  1. (क) भारत में गरीबी उन्मूलन
    (ख) स्वास्थ्य और उसका महत्व
  2. (क) भारत में महिलाओं का सशक्तिकरण
    (ख) अंतर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य: मुद्दे और चुनौतियाँ
  3. (क) भारत में मानव विकास के विभिन्न दृष्टिकोण
    (ख) 1993 का विकेन्द्रीकरण और पंचायती राज
  4. (क) भारत में, जाति, वर्ग और लिंग के मुद्दे
    (ख) मानव सुरक्षा के संदर्भ में प्रवासन के मुद्दे
  5. (क) भारत, चीन, और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंध
    (ख) भारत में मानव सुरक्षा के मुद्दे


पाठ्यक्रम: महिलाएँ और शांति (एम जी पी ई-012)

अध्यापक जाँच सत्रीय कार्य

सत्रीय कार्य कोड : एम जी पी ई-012 / एम एस सी टी / टी एम ए / 2024-25

अंकभार: 100

आपको कुल पाँच प्रश्न करने हैं, प्रत्येक भाग में से कम से कम दो प्रश्नों का चयन करना अनिवार्य है। प्रत्येक प्रश्न के उत्तर की शब्द-सीमा लगभग 500 शब्द है। प्रत्येक प्रश्न 20 अंक का है।

भाग – I

  1. वॉल्ट, वॉल्ट, रोस्टोव (W.W. Rostow) और शुम्पीटर (Schumpeter) जैसे विद्वानों द्वारा आर्थिक विकास के सिद्धांतों के गुणों (कुंजीभूत) और सीमाओं का वर्णन कीजिए।
  2. पर्यावरणीय संरक्षण के क्षेत्र में महिलाओं के विशिष्ट योगदान का वर्णन कीजिए। उदाहरणों सहित स्पष्ट कीजिए।
  3. भारत में समकालीन महिलाओं के आंदोलनों के लिए अपने आंकलन में गांधीवादी विरासत क्या है?
  4. इस्लाम और ईसाई धर्मग्रंथों में महिलाओं की स्थिति पर चर्चा कीजिए।
  5. क्या आप सोचते हैं गुणात्मक हिंसा महिलाओं को प्रभावित करती है? उदाहरणों सहित स्पष्ट कीजिए।

भाग – II

निम्नलिखित पर लगभग 250 शब्दों (प्रत्येक) में संक्षिप्त लेख लिखिए:

  1. क) कार्यस्थल पर यौन-उत्पीड़न
    ख) ‘दहेज’, महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के एक रूप में
  2. पर्यावरण संरक्षण में महिला आंदोलनकारियों का योगदान
  3. संरचनात्मक जेंडर (लिंग) आधारित हिंसा के विभिन्न रूप
    क) घरेलू हिंसा
    ख) कार्यस्थल पर हिंसा
  4. शांति निर्माण में महिलाओं द्वारा अपनाई शांति पहलों
    क) ‘सेल्फ हेल्प ग्रुप’ आंदोलन
  5. आर्थिक-न्याय
    क) स्वदेशी महिला आंदोलन


पाठ्यक्रम: नागरिक समाज, राजनीतिक शासन और संघर्ष (एम जी पी ई-013)

अध्यापक जाँच सत्रीय कार्य

सत्रीय कार्य कोड : एम जी पी ई-013 / ए एस एस ई / टी एम ए / 2024-25

अंक: 100

आपको कुल पांच प्रश्न करने हैं, प्रत्येक भाग में से कम से कम दो प्रश्नों का चयन करना अनिवार्य है। प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को शब्द-सीमा लगभग 500 शब्द है। प्रत्येक प्रश्न 20 अंक का है।

भाग – I

  1. नागरिक समाज की पारंपरिक अवधारणा और इसकी आधुनिक परिकल्पनाओं में निहित अंतर को स्पष्ट कीजिए।
  2. भारतीय राज्य और नागरिक समाज के बीच संबंधों के स्वरूप की समीक्षा कीजिए।
  3. भूमंडलीकरण प्रक्रिया बाजार, राज्य और नागरिक समाज के बीच के संबंधों को किस प्रकार से परिवर्तित कर रही है? व्याख्या कीजिए।
  4. गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) की भूमिका और प्रासंगिकता पर उपयुक्त उदाहरणों सहित टिप्पणी कीजिए।
  5. लोक संस्कृति क्या है? इसकी ‘संवेदनशीलता के रूप में विकास, खोज प्रक्रिया और इसकी विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

भाग – II

प्रश्न के प्रत्येक भाग पर लगभग 250 शब्दों में टिप्पणी कीजिए:

  1. (क) बालवी दुर्गों (होल्ड माडर्न) पर प्रतिरोध लगाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय अभियान
    (ख) भारतीय शांति आंदोलनों की उपलब्धियां और सीमाएं
  2. (क) स्त्री और पुरुष समाज के मनुष्य के रूप में अंतर्राष्ट्रीय नागरिक समाज : अमेरिकी और भारतीय परिप्रेक्ष्य
    (ख) गांधी आंदोलनों के उदय और विकास का एक लघु अध्ययन
  3. (क) मानवाधिकारों का सार्वभौम घोषणा पत्र (UDHR) : उद्देश्य और प्रस्ताव
    (ख) अंतर्राष्ट्रीय नागरिक समाज के मध्य अंतर्संबंध : विभिन्न प्रकार के राजनीतिक मॉडल


पाठ्यक्रम: गांधी पारिस्थितिकी और सतत विकास (एम जी पी ई–014)
अध्यापक जांच सत्रीय कार्य

सत्रीय कार्य क्रमांक : एम जी पी ई–014 / एम एस एस एस / टी ई / 2024–25
अंकभार: 100

आपको कुल पाँच प्रश्न करने हैं, प्रत्येक भाग में से कम से कम दो प्रश्नों का चयन करना अनिवार्य है। प्रत्येक प्रश्न के उत्तर की शब्द–सीमा लगभग 500 शब्द है। प्रत्येक प्रश्न 20 अंक का है।

भाग – I

  1. वैश्विक तापमान से संबंधित तत्कालीन बहस (वाद–विवाद) पर विचार व्यक्त कीजिए।
  2. भारत में पर्यावरणीय मूल्यों से संबंधित धार्मिक आदर्शों की विस्तार से स्पष्ट कीजिए।
  3. गांधी पर विभिन्न प्रभावों की परिणामी क्रियाओं जिसकी सहायता से उन्होंने पृथ्वी पर पर्यावरण पर अपने विचार व्यक्त किए।
  4. उनके रचनात्मक कार्य और एकीकृत ग्राम विकास से पारिस्थितिकी और विकास के संबंध पर प्रकाश डालिए तथा स्पष्ट कीजिए।
  5. वर्तमान संदर्भ में – गांधीवादी जीवनदर्शन और जीवनशैली की प्रासंगिकता की जांच कीजिए।

भाग – II

निम्नलिखित पर लगभग 250 शब्दों (प्रत्येक) में संक्षिप्त लेख लिखिए:

  1. रचनात्मक कार्यक्रम : खादी और ग्रामोद्योग
    क) मानव पारिस्थितिकी और पारिस्थितिक संतुलन के उपाय
    ख) सतत विकास और ग्राम स्वराज की गांधी की अवधारणा
    ग) पर्यावरणीय शिक्षा
  2. एक पारिस्थितिविद् के रूप में गांधी
  3. गांधी के जीवनदर्शन और कार्यों के समक्ष में मौजूदा आर्थिक की प्रमुख समस्याओं का समाधान
  4. गांधी के पर्यावरणीय विचारों का वर्तमान परिप्रेक्ष्य में प्रभाव
  5. गांधी के जीवनदर्शन और कार्यों का वर्तमान और भविष्य के पर्यावरणीय संकटों के समाधान में प्रासंगिकता पर आपके विचार और दृष्टिकोण


पाठ्यक्रम: शोध पद्धतियों का परिचय (एम जी पी ई–015)
अध्यायन जांच सत्रीय कार्य

सत्रीय कार्य: एम जी पी ई–025 / एम एस सी / टी एम ए / 2024–25
अंक: 100

आपको कुल पाँच प्रश्न करने हैं, प्रत्येक भाग में से कम से कम दो प्रश्नों का चयन करना अनिवार्य है। प्रत्येक प्रश्न के उत्तर की शब्द–सीमा लगभग 500 शब्द है। प्रत्येक प्रश्न 20 अंक का है।

भाग – I

  1. सामाजिक विज्ञान में शोध नियमनकारी नहीं होता। क्या आप इससे सहमत हैं? स्पष्ट कीजिए।
  2. क्या एक शोधकर्ता अपने अनुभव के चलते ही सामाजिक विज्ञान में अनुसंधानपरक दृष्टि का निर्माण कर सकता है? अपने उत्तर को तर्क–संगत बनाइए।
  3. शोध में नमूना बनाने (प्रतिनिधान) की तकनीक पर एक व्याख्यात्मक टिप्पणी लिखिए।
  4. सिद्धांत को परिभाषित कीजिए। आयामों के संबंध में सैद्धांतिक आयामों का पता लगाइए।
  5. कम्प्यूटर (संगणक) के आविष्कार के पहले और बाद – शोध प्रस्तुति विधि का सविस्तर विवेचन कीजिए।

भाग – II

निम्नलिखित पर लगभग 250 शब्दों (प्रत्येक) में सविस्तर लेख लिखिए:


  1. (क) क्षेत्र शोध अनुसंधान और सामाजिक विज्ञान अनुसंधान में इसके लाभ और सीमाओं को समझने के लिए गोपनीयता दृष्टिकोण
    (ख) पर्यवेक्षण तैयार करने की प्रमुख विशेषताएँ

  2. (क) गांधी का सत्याग्रह–विज्ञान में एक सैद्धांतिक और व्यावहारिक दृष्टिकोण
    (ख) सामाजिक विज्ञान अनुसंधान में नैतिकता के प्रमुख कारक

  3. (क) शोध मापनत्रकों के आधार पर
    (ख) शोध पद्धतियों और अनुसंधान विवेचन की वास्तविकता


पाठ्यक्रम: मानव अधिकार: भारतीय परिप्रेक्ष्य (एम जी पी ई–016)
अध्यापक जांच सत्रीय कार्य

सत्रीय कार्य कोड : एम जी पी ई–016 / एम एस एस टी / डी टी एस / 2024–25
पूर्णांक: 100

आपको कुल पाँच प्रश्न करने हैं, प्रत्येक भाग में से कम से कम दो प्रश्नों का चयन करना अनिवार्य है। प्रत्येक प्रश्न के उत्तर की शब्द–सीमा लगभग 500 शब्द है। प्रत्येक प्रश्न 20 अंक का है।

भाग – I

  1. मानव अधिकारों की पारम्परिक और गैर–पारम्परिक परम्पराओं का तुलनात्मक परीक्षण कीजिए।
  2. क्या आपको ऐसा प्रतीत होता है कि भारतीय संविधान के प्रस्तावना प्रावधान मानव के मौलिक अधिकारों का समर्थन करते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में तर्क दीजिए।
  3. ‘सत्याग्रह का सार मानव अधिकारों की अवधारणा है।’ (गाँधी)। टिप्पणी कीजिए।
  4. भारत में अस्पृश्यता के निवारण के लिए गाँधी द्वारा की गई पहल का वर्णन कीजिए।
  5. संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकारों का सार्वभौमिक घोषणा–पत्र (UN UDHR) के प्रावधानों की समीक्षा के द्वारा इसके महत्व को स्पष्ट कीजिए।

भाग – II

निम्नलिखित पर लगभग 250 शब्दों (प्रत्येक) में संक्षिप्त लेख लिखिए।

  1. क) मानव अधिकारों के संदर्भ में नागरिक समाज की भूमिका
    ख) महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन पर संयुक्त राष्ट्र समझौता
  2. क) भारत में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की समस्याएँ और उनके निदान के लिए किए गए कार्य
    ख) बच्चों के अधिकार और सुरक्षा का अधिकार
  3. क) दासता का उन्मूलन
    ख) सांस्कृतिक अधिकार
  4. क) भारत में बाल अधिकारों की प्रवृत्ति
    ख) उत्तर–आधुनिक परिप्रेक्ष्य और इसके सैद्धांतिक आधार
  5. क) भारत में मानव अधिकारों के प्रथम प्रवक्ता के रूप में गाँधी
    ख) पर्यावरण के अधिकार

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