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भारत एवं विश्व (एमपीएसई-001)
अध्यापक जांच सत्रीय कार्य
सत्रीय कार्य कोड: एसएसएसटी/एमपीएसई-001/2024-2025
पूर्णांक: 100
इनमें से किन्हीं पांच प्रश्नों के उत्तर दीजिए, प्रत्येक भाग से कम से कम दो प्रश्नों का चयन आवश्यक है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 500 शब्दों में दीजिए। प्रत्येक प्रश्न 20 अंकों का है।
भाग — 1
- उन विभिन्न अभिकरणों (Agencies) की भूमिका की व्याख्या कीजिए जो भारत की विदेश नीति का निर्माण करती हैं।
- भारत-चीन के मध्य संबंधों के मुख्य मुद्दे क्या हैं? व्याख्या कीजिए।
- भारत की पड़ोसी विदेश नीति क्या है? इसकी सफलता और असफलता की व्याख्या कीजिए।
- भारत की विदेश नीति में इसके आरम्भ से काफी परिवर्तन आया है। पिछले दस वर्षों में हुए मुख्य परिवर्तनों की पहचान कीजिए।
- ‘नेहरूवादी आम सहमति’ से आप क्या समझते हैं? व्याख्या कीजिए।
भाग — 2
प्रश्न के प्रत्येक भाग पर लगभग 250 शब्दों में टिप्पणी कीजिए:
- क) भारतीय विदेश नीति की संधीय विशेषतायें
ख) भारत की ‘सागर’ (SAGAR) नीति - क) सार्क (SAARC)
ख) बिम्सटेक (BIMSTEC) - क) गुजराल सिद्धान्त
ख) नदी जल विवाद - क) भारत की परमाणु नीति
ख) दक्षिण एशिया में हथियारों की होड़ - क) भारत – पाकिस्तान संबंध
ख) भारत – नेपाल संबंध
लैटिन अमेरिका में राज्य एवं समाज (एमपीएसई-002)
अध्यापक जांच सत्रीय कार्य
सत्रीय कार्य कोड: एमपीएसई-002/2024-2025
पूर्णांक: 100
इनमें से किन्हीं पांच प्रश्नों के उत्तर दीजिए, प्रत्येक भाग से कम से कम दो प्रश्नों का चयन आवश्यक है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 500 शब्दों में दीजिए। प्रत्येक प्रश्न 20 अंकों का है।
भाग — 1
- सामयिक लैटिन अमेरिका अनेक प्रकार से अपनी औपनिवेशिक विरासत का एक कैदी है। स्पष्ट कीजिए।
- कैरेबिया में वृक्षारोपण अर्थव्यवस्था की विशिष्टताओं का परीक्षण कीजिए।
- हाल के वर्षों में लैटिन अमेरिकी देशों द्वारा अपनायी गयी नव-उदारवादी आर्थिक नीतियों के मुख्य अवयवों का वर्णन कीजिए।
प्रश्न के प्रत्येक भाग पर लगभग 250 शब्दों में टिप्पणी कीजिए:
क) लैटिन अमेरिका में नये सामाजिक आंदोलनों की विशेषताएं
ख) लैटिन अमेरिका में थक्वकी लोकतंत्र
ग) लैटिन अमेरिका में भूमिहीन मजदूरों की स्थिति और आंदोलनों पर एक निबंध लिखिए।
भाग — 2
- प्रश्न के प्रत्येक भाग पर लगभग 250 शब्दों में टिप्पणी कीजिए:
क) अर्जेंटीना के पेरे
ख) जोस डी. सैम मार्टिन - लैटिन अमेरिका का अनुभव यह दर्शाता है कि राजनीतिक लोकतंत्र और आर्थिक विकास एक-दूसरे को प्रोत्साहित करते हैं। चर्चा कीजिए।
- लैटिन अमेरिका में क्षेत्रवाद के विकास का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
- प्रश्न के प्रत्येक भाग पर लगभग 250 शब्दों में टिप्पणी कीजिए:
क) लैटिन अमेरिका में लोकतांत्रिक संक्रमण का स्वरूप
ख) लैटिन अमेरिका मुद्रा व्याज संघ - सन 1853 से 1930 के मध्य यूरोपीय देशों के लिए पैम्पास का एक ‘खाद टोकरी’ के रूप में उत्थान और पतन का परीक्षण कीजिए।
:
पश्चिमी राजनीतिक चिंतन (प्लेटो से मार्क्स तक) (एमपीएसई-003)
अध्यापक जांच सत्रीय कार्य
सत्रीय कार्य कोड: एएसएसएसटी/एमपीएसई-003/2024-2025
पूर्णांक: 100
इनमें से किन्हीं पांच प्रश्नों के उत्तर दीजिए, प्रत्येक भाग से कम से कम दो प्रश्नों का चयन आवश्यक है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 500 शब्दों में दीजिए। प्रत्येक प्रश्न 20 अंकों का है।
भाग – 1
- राजनीतिक चिंतन का राजनीतिक सिद्धांत और राजनीतिक दर्शन से कैसे भेद किया जाता है? व्याख्या कीजिए।
- चर्च और राज्य के मध्य संबंधों पर संत थॉमस एक्वीनास की समझ की चर्चा कीजिए।
- जे. एस. मिल के निम्न कथन पर टिप्पणी कीजिए: “यह बेहतर है कि कोई असंतुष्ट सुकरात है बनिस्पत इसके कि वह संतुष्ट मूर्ख है।”
- पाश्चात्य राजनीतिक चिंतन में संत ऑगस्टीन का क्या प्रभाव रहा है? परीक्षण कीजिए।
- मैक्यावेली द्वारा सरकारों (शासनों) का विस्तृत वर्णन कीजिए।
भाग – 2
- प्लेटो के न्याय की अवधारणा की व्याख्या कीजिए।
- अरस्तू की संवैधानिक सरकार की समझ पर चर्चा कीजिए।
- हॉब्स और लॉक के समाजिक अनुबंध सिद्धांत का तुलना कीजिए।
- रूसो के समाजिक अनुबंध में ‘सामान्य इच्छा’ की अवधारणा की समीक्षा कीजिए।
- मार्क्स के अनुसार राज्य की प्रकृति और कार्य पर चर्चा कीजिए।
भाग – 2
प्रश्न के प्रत्येक भाग पर लगभग 250 शब्दों में टिप्पणी कीजिए:
क) संप्रभु के अधिकारों और दायित्वों पर थॉमस हॉब्स के विचार
ख) बैंथम का राजनीतिक दर्शन
7.
क) प्रतिनिधात्मक शासन पर जे. एस. मिल के विचार
ख) धर्म और सहनशीलता पर एडमंड बर्क के विचार
8.
क) मानव प्रकृति का इम्मैनुएल कांट का पराज्ञानात्मक-आदर्शवादी दृष्टिकोण
ख) धर्म पर एल्विन का तर्किक के विचार
9.
क) प्लेटो की क्रियाविधि
ख) हिगेल का राज्य का सिद्धान्त
10.
क) मार्क्स का ऐतिहासिक भौतिकवाद
ख) नागरिक समाज और सामाजिक समझौते पर जॉन लॉक के विचार
आधुनिक भारत में सामाजिक एवं राजनीतिक चिंतन (एमपीएसई-004)
अध्यापक जांच सत्रीय कार्य
सत्रीय कार्य कोड: एमएससीटी/एमपीएसई–004/2024-2025
पूर्णांक: 100
इनमें से किन्हीं पांच प्रश्नों के उत्तर दीजिए, प्रत्येक भाग से कम से कम दो प्रश्नों का चयन आवश्यक है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 500 शब्दों में दीजिए। प्रत्येक प्रश्न 20 अंकों का है।
भाग – 1
- पूर्व–आधुनिक भारतीय राजनीतिक चिंतन में धर्म और राजनीति के अंत:संबंधों की चर्चा कीजिए।
- भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में श्री अरविंदो की समालोचना का परीक्षण कीजिए।
- 19वीं शताब्दी के आरंभ में भारत में राष्ट्रवाद के उदय की जांच कीजिए।
- नकारात्मक और सकारात्मक हिंदुत्व पर एम.एस. गोलवलकर के विचारों का परीक्षण कीजिए।
- जाति व्यवस्था और इसके विघटन पर डॉ. बी.आर. अंबेडकर के विचारों की चर्चा कीजिए।
भाग – 2
प्रश्न के प्रत्येक भाग पर लगभग 250 शब्दों में टिप्पणी कीजिए:
- क) राष्ट्रवाद पर स्वामी विवेकानन्द के विचार
ख) डॉ. राम मनोहर लोहिया के समाजवादी विचार - क) उपनिवेशिक काल में साम्राज्यवादी आंदोलनों में मुसलमानों की भूमिका
ख) जवाहरलाल नेहरू की धर्मनिरपेक्षता की संकल्पना - क) हिंदू-मुस्लिम एकता पर सर सैयद अहमद खान
ख) द्वितीय लाहौर दरबार पर ई. वी. रामास्वामी नायकर - क) गांधी के राजनैतिक परिप्रेक्ष्य के दार्शनिक आधार
ख) जवाहरलाल नेहरू का वैज्ञानिक मानवतावाद - क) एम. एन. रॉय का परिवर्तकारी मानवतावाद
ख) रवीन्द्रनाथ टैगोर की राष्ट्रवाद की आलोचना
:
अफ्रीका में राज्य एवं समाज (एमपीएसई-005)
अध्यापक जांच सत्रीय कार्य
सत्रीय कार्य कोड: एसएसजीटी/एमपीएसई-005/2024-2025
पूर्णांक: 100
इनमें से किन्हीं पांच प्रश्नों के उत्तर दीजिए, प्रत्येक भाग से कम से कम दो प्रश्नों का चयन आवश्यक है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 500 शब्दों में दीजिए। प्रत्येक प्रश्न 20 अंकों का है।
भाग — 1
- अफ्रीका में दासों के व्यापार पर यूरोपीय प्रभावों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
- अफ्रीका में राष्ट्रवाद के उदय और स्वतंत्रता आंदोलनों की व्याख्या कीजिए।
- अफ्रीका में सैन्य और एकाधिकारवादी शासनों के उदय के लिए जिम्मेदार कारकों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
- अफ्रीका में विदेशी व्यापार और विविधता के विभिन्न विशिष्टताओं का वर्णन कीजिए।
- क्षेत्रीय संगठन के निर्माण में उप-सहारा अफ्रीका के वर्णन कीजिए।
भाग – 2
प्रश्न के प्रत्येक भाग पर लगभग 250 शब्दों में टिप्पणी कीजिए:
6.
क) भारत – अफ्रीका संबंध
ख) अफ्रीका में हिंसात्मक संघर्षों के कारण
7.
क) अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में अफ्रीका की स्थिति
ख) असहयोग आंदोलन (NAM) और अफ्रीका
8.
क) शीत-युद्ध के पश्चात् शांति अभियान
ख) अफ्रीका में चीन की भूमिका
9.
क) अफ्रीका में मानव सुरक्षा
ख) अफ्रीका में संरचनात्मक समन्वय कार्यक्रम (SAP)
10.
क) अफ्रीका में प्रचलित हिंसा
ख) नेपेड (NEPAD)
शांति और संघर्ष अध्ययन (एमपीएसई-006)
अध्यापक जांच सत्रीय कार्य
सत्रीय कार्य कोड: एसएसएसटी/एमपीएसई-006/2024-2025
पूर्णांक: 100
इनमें से किन्हीं पांच प्रश्नों के उत्तर दीजिए, प्रत्येक भाग से कम से कम दो प्रश्नों का चयन आवश्यक है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 500 शब्दों में दीजिए। प्रत्येक प्रश्न 20 अंकों का है।
भाग — 1
- शांति के प्रति नारीवादी दृष्टिकोण की मुख्य विशेषताओं का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
- प्रश्न के प्रत्येक भाग पर लगभग 250 शब्दों में टिप्पणी कीजिए:
क) प्रत्यक्ष और संरचनात्मक हिंसा
ख) शांति के प्रति पर्यावरणीय दृष्टिकोण - संघर्ष के प्रबंधन में राज्य की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
- विद्रोह (Insurgency) को परिभाषित कीजिए और विभिन्न प्रकार के विद्रोहों का परीक्षण कीजिए।
- प्रश्न के प्रत्येक भाग पर लगभग 250 शब्दों में टिप्पणी कीजिए:
क) युद्ध के कारणों का गॉल्टन का विश्लेषण
ख) आत्म-सुरक्षा के अधिकार पर संयुक्त राष्ट्र का घोषणा पत्र
भाग — 2
- यद्यपि हथियारों पर नियंत्रण और निरस्त्रीकरण, दोनों पदों को एक-दूसरे के लिए उपयोग किया जाता है, जबकि सैन्य स्थिरता के लिए ये दोनों अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। व्याख्या कीजिए।
- एशिया में शांति बहाली उपायों (CBMs) की विशिष्ट विशेषताओं का परीक्षण कीजिए और व्याख्या कीजिए कि ये किस प्रकार से यूरोप के उपायों से अलग हैं?
प्रश्न के प्रत्येक भाग पर लगभग 250 शब्दों में टिप्पणी कीजिए:
क) हथियार नियंत्रण के उपाय के रूप में आईएनएफ (INF) संधि
ख) परमाणु निरोध
- संघर्ष रोकथाम और संघर्ष निवारण में क्षेत्रीय संगठनों की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
प्रश्न के प्रत्येक भाग पर लगभग 250 शब्दों में टिप्पणी कीजिए:
क) अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय
ख) विश्व व्यापार संघ के विवाद समाधान कार्यविधि
भाग — 2 (जारी)
- अंतर्राष्ट्रीय संगठन जैसे संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक, और आईएमएफ़ की भूमिका का वर्णन कीजिए और आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
प्रश्न के प्रत्येक भाग पर लगभग 250 शब्दों में टिप्पणी कीजिए:
क) वैश्विक शासन की संरचना में सुधार
ख) अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण में यूएन का योगदान
- आयुध की होड़ और हथियारों के प्रसार के लिए जिम्मेदार कारकों का विश्लेषण कीजिए।
- भारत की परमाणु नीति की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए और इसका विश्लेषण कीजिए।
भारत में सामाजिक आंदोलन एवं राजनीति (एमपीएसई-007)
अध्यापक जांच सत्रीय कार्य
सत्रीय कार्य कोड: एसएससीटी/एमपीएसई-007/2024-2025
पूर्णांक: 100
इनमें से किन्हीं पांच प्रश्नों के उत्तर दीजिए, प्रत्येक भाग से कम से कम दो प्रश्नों का चयन आवश्यक है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 500 शब्दों में दीजिए। प्रत्येक प्रश्न 20 अंकों का है।
भाग – 1
- दलितों की राजनीतिक लामबंदी और बहुजन समाज पार्टी की भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
- सामाजिक आंदोलनों के परिप्रेक्ष्य में संसाधन संजयन सिद्धांत और सापेक्ष वंचककरण सिद्धांत की व्याख्या कीजिए।
- भारत में सामाजिक आंदोलनों के अध्ययन के लिए प्रयुक्त होने वाले विभिन्न दृष्टिकोणों की व्याख्या कीजिए।
- भारत में नृ-जातीय आंदोलनों के उद्भव को दिशा देने वाले प्रमुख कारकों की चर्चा कीजिए।
- भारत में आस्थाओं की राजनीति और इसके निहितार्थ का विश्लेषण कीजिए।
भाग – 2
प्रश्न के प्रत्येक भाग पर लगभग 250 शब्दों में टिप्पणी कीजिए:
- क) अखिल भारतीय मजदूर संघ सभा (AITUC)
ख) भारतीय किसान संघ (BKU) - क) असम के बोडो और स्वायत्तता के लिए उनका संघर्ष
ख) नर्मदा बचाओ आंदोलन - क) मानव विकास सूचकांक
ख) नए सामाजिक आंदोलन - क) केरल में मछुआरा जन आंदोलन
ख) भारत में महिलाओं के आंदोलन - क) चिपको आंदोलन और एपिको आंदोलन
ख) वैश्विक और किसानों का आंदोलन
:
भारत में राज्यीय राजनीति (एमपीएसई-008)
अध्यापक जांच सत्रीय कार्य
सत्रीय कार्य कोड: एसएसएसटी/एमपीएसई-008/2024-2025
पूर्णांक: 100
इनमें से किन्हीं पांच प्रश्नों के उत्तर दीजिए, प्रत्येक भाग से कम से कम दो प्रश्नों का चयन आवश्यक है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 500 शब्दों में दीजिए। प्रत्येक प्रश्न 20 अंकों का है।
भाग – 1
- भारतीय राज्यों के मध्य जल-विवादों की राजनीति और उसके प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
- भारत में नक्सलवादी आंदोलनों और उनके सामाजिक-राजनीतिक प्रभावों का परीक्षण कीजिए।
- भारत में क्षेत्रीय विभाजनाओं का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
- उन संवैधानिक संशोधनों का परीक्षण कीजिए जो भारत में केंद्र-राज्य संबंधों को प्रभावित करते हैं।
- भारतीय कृषि और समाज में हरित क्रांति के महत्व का मूल्यांकन कीजिए।
भाग – 2
प्रश्न के प्रत्येक भाग पर लगभग 250 शब्दों में टिप्पणी कीजिए:
6.
क) कांग्रेस प्रणाली का पतन
ख) स्वतंत्र भारत में राज्यों का पुनर्निर्माण
7.
क) चुनाव सुधार
ख) केन्द्र-राज्य संबंधों में विवादित क्षेत्र
8.
क) कूखुरी संरचना में जमींदारी प्रथा के उन्मूलन का प्रभाव
ख) भारत में राज्य स्वायत्तता आंदोलन
9.
क) दलित पैंथर आंदोलन
ख) राष्ट्रीय राजनीति के अध्ययन में मार्क्सवादी संरचना
10.
क) भारतीय राज्यों में औद्योगीकरण के प्रतिरूप
ख) भारत में भूमि-सुधार आंदोलनों की सीमायें
कनाडा : राजनीति एवं समाज (एमपीएसई–009)
अध्यापक जाँच सत्रीय कार्य
सत्रीय कार्य कोड: एसएसटीसी/एमपीएसई–009/2024-2025
पूर्णांक: 100
इनमें से किन्हीं पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए, प्रत्येक भाग से कम से कम दो प्रश्नों का चयन आवश्यक है।
प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 500 शब्दों में दीजिए। प्रत्येक प्रश्न 20 अंकों का है।
भाग – 1
- कनाडा की सरकार द्वारा मूलनिवासियों के स्वशासन के लिए राजनीतिक संरचना विकसित करने हेतु क्या उपाय किए गये हैं?
- कनाडा में बहुसंस्कृतिवाद की विशेषताओं का विश्लेषण कीजिए।
- कनाडाई उदार अंतर्राष्ट्रीयतावादी माध्यमिक शासन कौशल के पहलुओं के विशिष्ट गुणों का संक्षिप्त परीक्षण कीजिए।
- कनाडा के संघीय स्वरूप को प्रभावित करने वाले विकेंद्रीकरण से जुड़े मुद्दों का परीक्षण कीजिए।
- शीत–युद्ध के दौरान के वर्षों में भारत–कनाडा संबंधों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
भाग – 2
प्रश्न के प्रत्येक भाग पर लगभग 250 शब्दों में टिप्पणी कीजिए:
- क) कनाडा में संघवाद
ख) गवर्नर जनरल की शक्तियाँ और कार्य - क) कनाडा का मानव सुरक्षा का प्रावधान जो उसकी विदेश नीति में झलकता है।
ख) कनाडा में दल प्रणाली - क) कनाडा में नागरिक समाज और शासन
ख) कनाडा में वैश्वीकरण विरोधी आंदोलनों के दौरान उठाये गये मुद्दे - क) क्यूबेक राष्ट्रवाद
ख) कनाडा में पश्चिमी प्रांतों की शिकायतें - क) कनाडा में बहु-जातीय और बहुसांस्कृतिक समूह
ख) कनाडा में नीति समुदाय और दबाव समूह
विश्व के मामलों में यूरोपीय यूनियन (एमपीएसई-011)
अध्यापक जांच सत्रीय कार्य
सत्रीय कार्य कोड: एसएसएसटी/एमपीएसई-011/2024-2025
पूर्णांक: 100
इनमें से किन्हीं पांच प्रश्नों के उत्तर दीजिए, प्रत्येक भाग से कम से कम दो प्रश्नों का चयन आवश्यक है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 500 शब्दों में दीजिए। प्रत्येक प्रश्न 20 अंकों का है।
भाग – 1
- यूरोपीय क्षेत्रीय एकीकरण की प्रक्रिया की व्याख्या करने के लिए, साम्यवाद का एक सिद्धांत के रूप में, आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
- यूरोपीय संसद के संविधान, भूमिका और कार्यों का विश्लेषण कीजिए।
- भारत – यूरोपीय संघ (EU) के संबंधों के स्वरूपों की जांच कीजिए।
- यूरोपीय संघ की सामूहिक कृषि नीति का विश्लेषण कीजिए।
- यूरोपीय संघ की जलवायु परिवर्तन हेतु पर्यावरण संरक्षण की नीति का विश्लेषण कीजिए।
भाग – 2
निम्नलिखित पर लगभग 250 शब्दों (प्रत्येक) में टिप्पणी लिखें:
क) चीन–यूरोपीय संघ (EU) संबंध
ख) यूरोपीय संघ और उसके संस्थानों में निर्णय लेने की प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए।
7.
क) एकल मुद्रा के लाभ
ख) यूरोपीय संघ (EU) के प्रति संयुक्त गणराज्य (UK) का दृष्टिकोण
8.
क) यूरोप और दक्षिण एशिया में क्षेत्रवाद की तुलना कीजिए।
ख) एम्सटर्डैम संधि
9.
क) यूरोपीय एकीकरण का नव–कार्यात्मक सिद्धान्त
ख) आर्थिक और मौद्रिक संघ
10.
क) संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)–यूरोपीय संघ (EU) संबंध
ख) भारत–यूरोपीय संघ (EU) रणनीतिक सहयोग
:
भाग – 2
निम्नलिखित पर लगभग 250 शब्दों (प्रत्येक) में टिप्पणी लिखें:
क) चीन–यूरोपीय संघ (EU) संबंध
ख) यूरोपीय संघ और उसके संस्थानों में निर्णय लेने की प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए।
7.
क) एकल मुद्रा के लाभ
ख) यूरोपीय संघ (EU) के प्रति संयुक्त गणराज्य (UK) का दृष्टिकोण
8.
क) यूरोप और दक्षिण एशिया में क्षेत्रवाद की तुलना कीजिए।
ख) एम्सटर्डैम संधि
9.
क) यूरोपीय एकीकरण का नव–कार्यात्मक सिद्धान्त
ख) आर्थिक और मौद्रिक संघ
10.
क) संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)–यूरोपीय संघ (EU) संबंध
ख) भारत–यूरोपीय संघ (EU) रणनीतिक सहयोग
:
ऑस्ट्रेलिया में राज्य और समाज (एमपीएसई-012)
अध्यापक जांच सत्रीय कार्य
सत्रीय कार्य कोड: एसएसएसटी/एमपीएसई-012/2024-2025
पूर्णांक: 100
इनमें से किन्हीं पांच प्रश्नों के उत्तर दीजिए, प्रत्येक भाग से कम से कम दो प्रश्नों का चयन आवश्यक है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 500 शब्दों में दीजिए। प्रत्येक प्रश्न 20 अंकों का है।
भाग – 1
- ऑस्ट्रेलियाई जनसंख्या की मुख्य विशेषताओं को रेखांकित कीजिए।
- अतीत में ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय पहचान को किस प्रकार देखा जाता था? यह क्यों और कैसे बदल रही है?
- ऑस्ट्रेलिया के बहुसंस्कृतिवाद के उद्भव की व्याख्या कीजिए।
- ऑस्ट्रेलिया के संविधान में उल्लिखित ऑस्ट्रेलियाई सीनेट की भूमिका और शक्तियों का वर्णन कीजिए।
- वैश्विक अर्थव्यवस्था के संदर्भ में ऑस्ट्रेलिया की आर्थिक शक्ति और इसके आगे के लिए दिशा की जांच कीजिए।
भाग – 2
प्रश्न के प्रत्येक भाग पर लगभग 250 शब्दों में टिप्पणी कीजिए:
- क) ऑस्ट्रेलिया में भारतीय प्रसार (प्रवासी)
ख) ऑस्ट्रेलिया में राजनीतिक दलों की भूमिका - क) ऑस्ट्रेलिया में विकास रणनीतियाँ
ख) ऑस्ट्रेलिया में घरेलू अर्थव्यवस्था और वैश्वीकरण - क) कोविड के पश्चात् ऑस्ट्रेलिया-चीन के संबंध
ख) भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों में शिक्षा एक कारक के रूप में - क) ऑस्ट्रेलिया में संघीय ढांचा
ख) ऑस्ट्रेलिया में दबाव समूह - क) ऑस्ट्रेलिया और हिन्द महासागर
ख) ऑस्ट्रेलिया में अप्रवासियों की चुनौतियाँ
ऑस्ट्रेलिया की विदेश नीति (एमपीएसई-013)
अध्यापक जांच सत्रीय कार्य
सत्रीय कार्य कोड: एसएसएसटी/एमपीएसई-013/2024-2025
पूर्णांक: 100
इनमें से किन्हीं पांच प्रश्नों के उत्तर दीजिए, प्रत्येक भाग से कम से कम दो प्रश्नों का चयन आवश्यक है।
प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 500 शब्दों में दीजिए। प्रत्येक प्रश्न 20 अंकों का है।
भाग – 1
- ऑस्ट्रेलिया की विदेश नीति का निर्माण करने वाले कारकों का परीक्षण कीजिए।
- शीत युद्ध के दौरान अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया संबंधों की व्याख्या कीजिए।
- चीन और ऑस्ट्रेलिया के मध्य आर्थिक संबंधों की व्याख्या कीजिए।
- ऑस्ट्रेलिया में संवाद का कार्यान्वयन को प्रभावित करने वाले कारकों का परीक्षण कीजिए।
- वैश्वीकरण के युग में उन चुनौतियों का परीक्षण कीजिए जिनका सामना ऑस्ट्रेलिया को अपने व्यापार और निवेश के संबंध में करना पड़ रहा है।
भाग – 2
प्रश्न के प्रत्येक भाग पर लगभग 250 शब्दों में टिप्पणी कीजिए:
- क) ऑस्ट्रेलिया में संवाद के नये स्वरूप
ख) ऑस्ट्रेलिया में सीनेट और कार्यपालिका के मध्य संबंध - क) ऑस्ट्रेलिया के जैवविविधता के विशेष लक्षण
ख) ऑस्ट्रेलिया में पर्यावरणीय विधान - क) चीन की मुक्त द्वार नीति का ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
ख) विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सुदृढ़ीकरण में ऑस्ट्रेलिया का प्रयास - क) भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध और क्वाड (QUAD)
ख) वैश्वीकरण के दौर में ऑस्ट्रेलिया अर्थव्यवस्था की प्रकृति - क) ऑस्ट्रेलिया में मानव अधिकार का मुद्दा
ख) परमाणु हथियारों की भूमिका में ऑस्ट्रेलिया का स्थान

